Sarso Ki kheti: सरसों की खेती में है सफेद तना गलन रोग तो ये सस्ता सा उपाय करें किसान, भरपूर होगा लाभ

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Sarso Ki kheti : सरसों की खेती (सरसों की फसल) भारत के अधिकांश क्षेत्रों में होती है और यह एक मुख्य रबी सीजन की फसल है। पिछले कुछ सालों में सरसों की बुवाई जा रही है और इसमें बढ़ोत्तर महत्व हो रहा है। इसका कारण है सरसों के उच्च मूल्य जो पिछले कुछ सालों में मिल रहा है, जिसके कारण किसानों का इसमें रुझान बढ़ा है।

हालांकि, सरसों की फसल में कई प्रकार की बीमारियां होती हैं, जिसके कारण समय पर उपचार न करने से उत्पादन में कमी हो सकती है और सरसों के मंडी भाव अच्छे नही मिल पाते।

Sarso Ki kheti सरसों की खेती में सफेद तना गलन रोग

सरसों की फसल (सरसों की खेती) में सफेद तना गलन रोग की समस्या बढ़ रही है, इस समस्या के कारण किसानों को अपनी उत्पादन में काफी नुकसान हो रहा है। इस रोग का इलाज करना किसानों के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसके लिए अभी तक कोई पूरी तरह से प्रभावी उपाय नहीं मिला है।

हालांकि, किसान अपनी भूमि के सही उपचार और बीच उपचार के माध्यम से इस रोग को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त कर सकता है।

सरसों की खेती में सफेद तना गलन रोग की पहचान कैसे करें?

किसानों ने सरसों की फसल Sarso Ki kheti में एक रोग को अक्सर देखा है – सरसों के पौधों के तने में गलन रोग। इस रोग के कारण तने में सफेद रंग की फंगस की तरह दिखता है, जो थोड़ी दूरी पर जमीन से ऊपर उठा होता है। कुछ दिनों बाद, यह सुख जाता है और रंगीन धब्बे दिखाई देते हैं। इसके बाद, तने में सफेद, काले और बुरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे फसल को होने वाला क्षति होती है।

Sarso Ki kheti सरसों की फसल में सफेद तना गलन रोग कब फैलता है

किसान भाइयों, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सरसों की फसल Sarso Ki kheti में सफेद तना गलन रोग का सबसे ज्यादा प्रकोप दिसंबर और जनवरी महीने में होता है। इस समय सर्दी का मौसम रहता है और खेतों में पानी देने के बाद और बारिश से बढ़ी हुई नमी के कारण यह रोग फैलता है। इस रोग का इलाज नहीं होता है, इसलिए सही समय पर उपाय करना जरूरी है।

सरसों की फसल Sarso Ki kheti में सफेद तना गलन रोग की रोकथाम कैसे करें?

किसान भाइयों, सरसों की फसल Sarso Ki kheti में सफेद तना गलन रोग से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है इससे पहले ही रोकथाम करना। अगर रोग हो जाता है, तो इसे कंट्रोल करना कठिन हो सकता है।

आप इसे पहले ही रोकने के लिए कार्बेन्डाजिम 0.1% का सरसों की फसल में 45 से 50 दिन के बाद छिड़काव करें, और फिर इसके बाद 15 दिन के अंतराल में 1 स्प्रे करें। इसके बाद, एक और स्प्रे को 15 दिन के बाद करें। यानी, आपको कुल मिलाकर दो स्प्रे करने होंगे।

किसान भाईयों आप इस प्रकार सरसों की फसल में सफेद तना गलन रोग से अपनी खेती को बच पाएंगे और अधिक मुनाफा काम पाएंगे। खेती संबंधित जानकारी के लिए हमारी वेबसाईट KisanEkta.in से जुड़े रहें

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